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[texts]ढलती उम्र में मन की उठान - प्रफुल्ल कोलख्यान
अपनी भौतिक परिस्थतियों के कारण चाँद आसमान से हिल नहीं सकता और कुमुदनी आसमान में जा नहीं सकती! फिर? कुमुदनी के प्राण का अधार पानी चाँद की परछाई के लिए जगह बनाता है। यहीं प्रेम का मन भौतिक स्थिति...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan; hindi; प्रेम
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[texts]जल बीच मीन पियासी - प्रफुल्ल कोलख्यान
यह बिल्कुल निराधार आशंका नहीं है कि जिनके हित में आंतरिक उपनिवेश का बने रहना ही जरूरी था उन्हीं के हाथों में बाहरी उपनिवेश से मुक्ति के नेतृत्व का होना इस आत्मघात का प्रमुख कारण बना। तात्पर्...
Keywords: कोलख्यान; स्त्री-विमर्श; आलोचना; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]Gazette Of Madhya Pradesh( Extraordinary) 08 October 2008 No. 657 - Government Of Madhya Pradesh, India
Gazette of Madhya Pradesh(Extraordinary) 08 October 2008 No.657
Keywords: Gazette of Madhya Pradesh(Extraordinary) 08 October 2008 No.657
[texts]पावस मृदुल-मृदुल बरसे - फ्रफुल्ल कोलख्यान
सामाजिकता संबंधों के समुच्चय का ही एक नाम है। आज का एक बड़ा समाजिक संकट यह है कि संबंधों के बीच का पानी सूख गया है। चाहे  संबंध मनुष्य के साथ के हों या अन्य प्राणियों और प्रकृति के ही साथ के क्यो...
Keywords: कोलख्यान; पावस; kolkhyan; hindi
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[texts]पुराने अंतर्विरोधों की नई जटिलताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
क्षमता बढ़ने से `अंतर्निर्भरता' घटती है। अंतर्निर्भरता घटने से व्यक्ति के `नैतिक' होने की सामाजिक बाध्यता कम होती जाती है। विकास का समस्त `नैतिक-मूल्य' से विरत `क्षमता' से परिचालित होता है। क्ष...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; ग्रंथित; अंतर्विरोध; kolkhyan; hranthit
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[texts]जीवन के दिन-रैन का, कैसे लगे हिसाब - प्रफुल्ल कोलख्यान
कभी-कभी छोटी मछलियों को निगलना जितना आसान होता है उसे हजम करना उतना ही मुश्किल होता है। बहुराष्ट्रीय पूँजी की दुष्टताएँ अंतत: राष्ट्रीय पूँजी को विषाक्त बना देती हैं। दक्षिणपंथ का भूमंडलीक...
Keywords: कोलख्यान; कट्टरता; अरुण; आलोचना; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]Brahamharshi Bamsha Bistar - Swami Sahajanand Sarswoti, scanner Chandra P Sharma
History of Bhumihar Brahmin by Sahjanand Sarswoti, 2004 Edition Scanned by Chandra P Sharma which was Published by Shri Sitaramashram Trust, Patna, Bihar
Keywords: History of Bhumihar Brahmin
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[texts]गुजरात का अंतर्पाठ ग्रंथित - प्रफुल्ल कोलख्यान
बाहरी और भीतरी गुलामी को कारगर तरीके से लाने की प्रयोगशाला पूरी विकासशील दुनिया बनाई जा रही है। आज यह गुजरात में दीख रहा है, कल किसी दूसरी जगह दिखेगा। इस प्रयोगशाला से चाहे जो निष्कर्ष निकले ''...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; गुजरात; ग्रंथित; kolkhyan; hindi; gujrat; granthit
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[texts]हमारा समय - प्रफुल्ल कोलख्यान
एक पूरी वयस्क भाषा मेंहमारा समयइस सवाल के सामने पड़ा हैजहाँ मौत की शर्त्त परजिंदगी हथियानी है
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]एक आदमी के ज़िद की आंतरिक रिपोर्ट - प्रफुल्ल कोलख्यान
कथातीत कथ्य और संवेदनातीत समझ का प्रभावशील साहित्यिक महत्त्व बन नहीं पाता है। प्रगतिशील और प्रगतिरोधी शक्तियों के अंतर्द्वंद्व को सामने लाने के अपने रचनात्मक संकल्प तो हैं लेकिन, कथ्य के क...
Keywords: कोलख्यान; दूधनाथ; उपन्यास; आलोचना; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]गुजरात का अंतर्पाठ - प्रफुल्ल कोलख्यान
गुजरात की घटना का अंतर्पाठ यह है कि बाहरी और भीतरी शक्तियाँ मिलकर वैश्वीकरण के जाल में हमारी राष्ट्रीय संप्रभुता और हमारे जनतांत्रिक हक को फँसाना चाहती है। ‘बाँटो और राज करो’ के राजनीतिक सू...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; गुजरात; kolkhyan; hindi; gujrat
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[texts]Prafulla Kolkhyan Ki Kahani Terah Kathwa. - Prafulla Kolkhyan
Kahani Terah Kathwa.
Keywords: Kahani Terah Kathwa
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[texts]Prafulla Kolkhyan Sathaniya Kavi - Prafulla Kolkhyan
Sathaniya Kavi
Keywords: Kolkhyan; Sathaniy; Kavi
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[texts]माँ का क्या होगा - प्रफुल्ल कोलख्यान
माँ का क्या होगा ?? लोभ की चपेट में फँसकर ऐसा समाज विकसित होता जा रहा है जिसमें न बूढों के लिए सच्चा आदर बचा है न बच्चों के लिए सच्चा स्नेह। ऐसा समाज न सिर्फ परंपराओं की अच्छाइयों से विमुख होता है...
Keywords: कोलख्यान; समाज; आलोचना; हिंदी; kolkhyan
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[texts]जरूरी है देश - प्रफुल्ल कोलख्यान
कोई ईश्वर नहीं, कोई धर्म नहीं, कोई ग्रंथ नहीं,कोई ज्ञान नहीं, कोई विज्ञान नहीं, कोई विवेक नहींजो एहसास करा सके आदमी को कि जब नैया डूबती हैतब बचते वे भी नहीं, जिनके पैर मेंखूबसूरत, चमकदार, कीमती जू...
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; kolkhyan; kavita; hindi
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[texts]अस्मिता क्या और क्यों - प्रफुल्ल कोलख्यान
नव-सामाजिक आंदोलनों की खासियत यह है कि ये अस्मिता के सवाल को तो उठाते हैं, लेकिन उसके वर्गीय आधार को नकारते  हैं। बल्कि ये अपने को सामाजिक दायरे के नाम पर आर्थिक और राजनीतिक प्रसंग को अपने लिए ...
Keywords: कोलख्यान; अस्मिता; आलोचना; kolkhyan; hindi
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[texts]हिंसा पर टिकी सभ्यता - प्रफुल्ल कोलख्यान
नागार्जुन जैसे बड़े कवि कहते हैं कि प्रति-हिंसा ही उनके कवि का स्थायी भाव है। ऐसा कहने के पीछे कवि की वेदना है, इसे उल्लास की तरह नहीं पढ़ा जाना चाहिए। यह एक गहरी बात है। इसे फूंक मार कर उड़ा देन...
Keywords: कोलख्यान; हिंसा; सभ्यता; kolkhyan; hindi; हिंदी
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[texts]साहित्य का समाज शास्त्र - प्रफुल्ल कोलख्यान
‘मधुरी बानी’ बोलनेवाली उदारीकरण-निजीकरण-भूमंडलीकरण की वैश्विक प्रक्रिया के अंतर्गत विकसित ‘तिरगुन फाँस’ राष्ट्र और राज्यव्यवस्था की विफलताओं के हवाले से सभ्यता संररचना की मौलिक इकाई के ...
Keywords: कोलख्यान; आलोचना; साहित्य; समाज; शास्त्र; kolkhyan; hindi
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[texts]Gazette Of Madhya Pradesh( Extraordinary) 14 March 1985 No. 88 - Government Of Madhya Pradesh, India
Gazette of Madhya Pradesh(Extraordinary) 14 March 1985 No.88
Keywords: Gazette of Madhya Pradesh(Extraordinary) 14 March 1985 No.88
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
वह कौन लगता हैहमारा आपका हम सबकाउसे किस भाषा में बतायें कि उसे प्यार करना चाहिएयह उसका देश है
Keywords: कोलख्यान; कविता; kolkhyan; kavita
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[texts]आँसू की छाया - प्रफुल्ल कोलख्यान
साहित्य के कमलवन में छिड़े गजग्राह युद्ध से बहुत दूर ऐसे संघर्षशील लोग कहीं भी मिल सकते हैं। गजग्राह युद्ध के बाहर यह पीपिलिका संघर्ष किसलिए जारी रहा करता है! क्या मिलता है? अभिव्यक्ति का सुख?...
Keywords: kolkhyan; Aasu ki chhaya; hindi; कोलख्यान; हिंदी; आँसू की छाया
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[texts]राष्ट्रीयता, नगरीयता और नागरिकता - प्रफुल्ल कोलख्यान
नागरिकता का संबंध संवैधानिक रूप से भले ही राष्ट्रीयता से पुष्ट और  परिभाषित होता हुआ दिखता रह सकता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से नागरिकता का संबंध निकृष्टतम अर्थों में नगरीयता से अपभाषित और स...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; राष्ट्रीयता; नगरीयता; नागरिकता; kolkhyan; hindi
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[texts]Prafulla Kolkhyan Kavitayen.. - Prafulla Kolkhyan
Kavita
Keywords: kolkhyan; kavita; hindi
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[texts]HAMRI YADE HAMARA HARDA - Gyanesh Choube
Memory book of Harda By Gyanesh Choube
Keywords: Harda; Gyanesh Choube
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[texts]How To Write In Board Exams ( Loku) - Lokesh Chandra Lal 'Priyalok' Loku
The rules to write in the board WBBSE exams.
Keywords: style to write in wbbse; RULES how to write in WBBSE exams
[texts]पर हित और पराई पीर - प्रफुल्ल कोलख्यान
 ‘सर्वभूतों’ को आत्मवत बतानेवाली संस्कृति में ‘पराई पीर’ और  ‘पर हित’ का ‘पर’ कौन है.. इस ‘पर’ की पहचान क्या है? किसी के ‘पर’ हो जाने की प्रक्रिया क्या है? तुलसीदास का संदर्भ लें तो जिसे राम-वैद...
Keywords: कोलख्यान; परहित; पराईपीर; kolkhyan; hindi
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[texts]देश में जनादेश का संदेश - प्रफुल्ल कोलख्यान
भारत में जनतंत्र बहुत लंबे संघर्ष के बाद स्थापित हुआ है। जनतांत्रिक व्यवस्था में जनादेश का बहुत महत्त्व होता है। जनादेश को समझने में हुई चूकों की भारी कीमत समाज को चुकानी पड़ती है। यह कीमत त...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; जनादेश; kolkhyan; hindi
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[texts]बच्चा उदास है - प्रफुल्ल कोलख्यान
बच्चा उदास है होशियार बच्चेतमीज दे रहे हैं किअपराध हैजाना इस खेल के खिलाफ
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]अपने मोर्चे पर मरने की जिद्द - प्रफुल्ल कोलख्यान
.... घर के बदले पहुँच गया अजायब घर। डेढ़ दो घंटे तक घूम-फिर कर देखने के बाद मन कुछ हल्का था। और था यह एहसास कि किन-किन मुश्किलों का सामना करते हुए, उन पर अपने ढंग की विजय हासिल करते हुए मनुष्य आज तक क...
Keywords: kolkhyan; hindi; कोलख्यान
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[texts]अंतिम क्षण में जनतंत्र - प्रफुल्ल कोलख्यान
बिना किसी आदर्श के, बिना किसी नायक के किसी सामाजिकता की गत्यात्मकाता में आत्मीयता का कोई प्रसंग नहीं जुड़ता है। इसका एक कारण यह है कि आदर्श और नायक से ही लोगों के मनोजगत का तादात्मीयकरण संभव ह...
Keywords: कोलख्यान; जनतंत्र; आलोचना; प्रेमचंद; रघुवीर; kolkhyan; hindi
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[texts]अस्मिता क्या और क्यों - प्रफुल्ल कोलख्यान
नव-सामाजिक आंदोलनों की खासियत यह है कि ये अस्मिता के सवाल को तो उठाते हैं, लेकिन उसके वर्गीय आधार को नकारते  हैं। बल्कि ये अपने को सामाजिक दायरे के नाम पर आर्थिक और राजनीतिक प्रसंग को अपने लिए ...
Keywords: कोलख्यान; अस्मिता; हिंदी; kolkhyan; alochana
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[texts]Gazette Of Madhya Pradesh( Extraordinary) 14 February 1988 No. 57 - Government Of Madhya Pradesh, India
Gazette of Madhya Pradesh(Extraordinary) 14 February 1988 No.57
Keywords: Gazette of Madhya Pradesh(Extraordinary) 14 February 1988 No.57
[texts]साहित्य का समाज शास्त्र ग्रंथित - प्रफुल्ल कोलख्यान
 हम ‘गोदान’ की नींद में नहीं टहलते, गोदान के सपनों की अंतर्यात्रा बार-बार करते हैं;जितनी बार यह अंतर्यात्रा करते हैं, उतनी बार सपनों का पुनर्सृजन करते हैं। सपनों को नींद से अलगाना कितना कठिन ह...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; समाज; शास्त्र; समाजशास्त्र; आलोचना; kolkhyan; hindi
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[texts]कैसे कहूँ, कह नहीं सकता, क्यों गंधमादन रोज दस्तक देता है - प्रफुल्ल कोलख्यान
किसके होने से कच्चे सपनों की मादक महक मुझे दीवाना बना देती हैकिसकी तलाश में मेरे आकाश का चाँद बादलों में सारी रात भटकता हैकिसकी पुकार पर खुशगवार चाँदनी मेरी आँखों में नंगे पाँव टहलती हैकौन ह...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]इनकार का हक और हक का इनकार - प्रफुल्ल कोलख्यान
मकान बनाने की ललक बढ़ी है। घर बसाने की ईहा कम हुई है। तलाक की घटना की संख्या में चिंतनीय वृद्धि हुई है। इन्हें जीवन-यापन में स्थायित्व के अवसरों की कमी से भी जोड़कर देखा जा सकता है। ......
Keywords: कोलख्यान; नैतिक; आलोचना; kolkhyan; hindi
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[texts]हिंदू मुस्लिम रिश्तेः नया शोध, नए निष्कर्ष - प्रफुल्ल कोलख्यान
यह सच है कि सत्ता और मुनाफा के लिए राजनेता सांप्रदायिक हिंसा को उपकरण बनाने से नहीं चूकते हैं लेकिन सत्ता और मुनाफा तो आधुनिकता का नहीं पूँजीवाद का अदम्य मनोरथ है। पूँजीवाद के राष्ट्रवादी और...
Keywords: कोलख्यान; हिंदू; मुस्लिम; शोध; सांप्रदायिकता; वार्ष्णेय; kolkhyan; hindi
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[texts]जीने के लिए चाहिए सारे-के-सारे औजार - प्रफुल्ल कोलख्यान
कविता को चाहिए उदास जीवन के अंत:करण में बची हुई करुणा का अंतिम राग। कविता को चाहिए ग्लेशियर की आत्मा में सोई हुई आग की अंतिम लौ। कविता को चाहिए प्रथम और प्रथमा के अद्वैत प्रगाढ़ आलिंगन की पहली ...
Keywords: कोलख्यान; कविता; आलोचना; अनिमेष; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]EPV Artical
Express Park View Apartments exceptional free flowing layouts, clean design and large expansive windows are the hallmark of these residences, that offer ample natural light and create a sense of space beyond the expected. Every corner of these 2 BHK and 3 BHK apartments ranging from 831 sq. ft. to 1458 sq. ft. respectively offers a space quality that exudes purity. ·         2 BHK – 831 sqft ·         2 BHK – 1000 sqft ·         3 BHK – 1267 sqft 3 BHK + Servant ...
Keywords: 3bhk resale flat in Express Park View
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[texts]कुछ तो हक अदा हुआ - प्रफुल्ल कोलख्यान
मातृभाषा का अपना महत्त्व हुआ करता है। निश्चित रूप से इसे स्वीकार करना ही चाहिए। लेकिन राष्ट्रभाषाओं या राजभाषाओं का भी अपना महत्त्व हुआ करता है। राष्ट्रीय जीवन में इसकी अवहेलना नहीं की जा स...
Keywords: कोलख्यान; नागार्जुन; kolkhyan; nagarjun
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[texts]Gazette Of Madhya Pradesh( Extraordinary) 29 December 1984 No. 570 - Government Of Madhya Pradesh, India
Gazette of Madhya Pradesh(Extraordinary) 29 December 1984 No.570
Keywords: Gazette of Madhya Pradesh(Extraordinary) 29 December 1984 No.570
[texts]Gazette Of Madhya Pradesh( Extraordinary) 13 March 1985 No. 83 - Government Of Madhya Pradesh, India
Gazette of Madhya Pradesh(Extraordinary) 13 March 1985 No.83
Keywords: Gazette of Madhya Pradesh(Extraordinary) 13 March 1985 No.83
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[texts]सांप्रदायिकता Link - प्रफुल्ल कोलख्यान
सांप्रदायिकता के बारे में 
Keywords: कोलख्यान.सांप्रदायिकता; kolkhyan
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[texts]आलोचना की संस्कृति - प्रफुल्ल कोलख्यान
जीवन-विवेक न उभय-निष्क्रियता की बात करता है और न निष्पक्षता का। ऐसा इसलिए कि विषम समाज अपनी निर्मिति में ही पक्षपातपूर्ण होता है। पक्षपातपूर्ण वातावरण में, निष्पक्षता चालू पक्षपातपूर्ण व्य...
Keywords: कोलख्यान; आलोचना; संस्कृति; kolkhyan; alochana; hindi
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[texts]दुःस्साध्य भाषिक कारीगरीः क़िस्सा कोताह - प्रफुल्ल कोलख्यान
जीवन में बदलाव की बयार बह रही है। साहित्य में इस बयार से एक नए तरह का वातावरण बन रहा है। विधाओं की परंपरागत सीमाएँ टूट रही हैं। इधर विधाओं के संदर्भ में यह सामान्य साहित्यिक प्रवृत्ति चलन में ...
Keywords: kolkhyan; hindi; कोलख्यान; राजेश; किस्सा; आलोचना
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[texts]ओ अनागत शिशु - प्रफुल्ल कोलख्यान
ओ अनागत शिशु
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]Hindi Book Kabeer Ji Ka Beejak Shabdakosh By Shri Hansdas Shastri
Hindi Book-Kabeer-ji-ka-Beejak-Shabdakosh by Shri Hansdas Shastri
Keywords: Hindi Book-Kabeer-ji-ka-Beejak-Shabdakosh by Shri Hansdas Shastri
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[texts]अति से क्षति - प्रफुल्ल कोलख्यान
सार्वजनिक सेवाओं का उपयोग करते हुए विशिष्टजनों का अपना काम करना सचमुच बहुत ही बांछनीय और प्रेरणाप्रद है,  लेकिन इससे इसका सर्वजन की सामान्य जीवन-स्थितियों पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। आगे आ...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; आम; आदमी; पार्टी; आप; kolkhyan; hindi; aap
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[texts]Aankhan Dekhi By Durgaprasad Agrwal 1 - Dr Durgaprasad Agrawal
Aankhan Dekhee is a travelogue. It describes my experiences of USA.  
Keywords: Travelogue; Hindi; USA
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[texts]Om Prakash Valmiki TEHELKA Interview - Reyazul Haque
An interview with leading Hindi poet and writer Om Prakash Valmiki on Caste and other issues. It was published in 2010 in Tehelka.
Keywords: Om Prakash Valmiki; Tehelka; Caste; Hindi; Reyaz
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[texts]सपना और साहस - प्रफुल्ल कोलख्यान
सभ्यता के कायदे से जूता पहनकरसपनों में टहलना गुनाह है
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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